Objectives

हमारे मुख्य उद्देश्य हैं- राष्ट्रीय एकता, संसाधनों का संरक्षण

राष्ट्रीय एकता- एक राष्ट्र, समृद्ध राष्ट्र

विभिन्न भाषा और संस्कृतियों के देश में सर्व प्रथम इस देश को कैसे एक सूत्र में बांधा जाए इसके लिए निरंतर प्रयास करने होंगे। इन सबके लिए कुछ सूत्र हो सकते हैं-

खेल-एकता मैराथन

दिव्यांगों की कला प्रर्दशनी

एकता यात्रा- भारत दर्शन, देश देखो

पर्यावरण-एकता गार्डन

एकता गान- गायन

संगीत- एकता संगीत

उत्सव- भारत उत्सव, अखिल भारतीय लोककला उत्सव आदि

विभिन्न वाद्यों के संगीत साधनों के साथ

सुरों का गायन

विभिन्न भाषाओं में गायन

-राष्ट्रीय एकता-दिवस गान

राष्ट्रीय नृत्यशाला-विभिन्न नृत्य शैलियां

एकता नाट्य उत्सव

-भारत को जानो- मेरा देश भारत- बच्चों के लिए पेंटिंग्स, क्विज प्रतियोगिता आदि

शहीदों का सम्मान- शहीदों का आदर सम्मान, उनके परिवारों की देख-रेख और सम्मान

संविधान सम्मत परिभाषा को सुदृढ़ करने हेतु प्रयास

एक भाषा एक देश- कभी संस्कृत संपूर्ण भारत को जोड़ती थी अब वही काम राजभाषा हिंदी कर रही है। इसका विभिन्न भाषाओं के साथ संबंध बेहतर बनाने के लिए सेमिनार, कार्यक्रम, कार्यशाला एवं आधुनिक तकनीकी का उपयोग करते हुए आईटी (सूचना तकनीकी) पोर्टल आदि का विकास

राष्ट्रीय एकता तब तक संभव नहीं जब तक नागरिकों को  उपलब्ध सुविधाओं में बराबर का हिस्सा मिलना सुनिश्चित न हो जैसे कि-

-शिक्षा (एजुकेशन)

– स्वास्थ्य (हेल्थ केयर)

-पोषण (न्यूट्रिशन)


संसाधनों का संरक्षण-

राष्ट्र के संसाधनों में हर एक नागरिक का बराबर का हिस्सा है। अगर कोई अमीर समझे कि मैं कुछ भी खरीद सकता हूं तो यह राष्ट्रीय एकता के लिए बड़ा खतरा साबित होगा, जैसे- भारत की धरती में प्रति वर्ष कुछ लाख टन ही अनाज पैदा होता है। अगर अमीर इसमें से एक बड़ा हिस्सा अपने गोदामों में भर दें तो भारत के नागरिकों को भूखा रहना पड़ सकता है।

गांधी जी ने कहा था कि प्रकृति आवश्यकताओं की पूर्ति तो कर सकती है, लेकिन किसी की भी लालसा की पूर्ति नहीं कर सकती है। समृद्धि का सिर्फ एक ही मंत्र है कि अंतिम व्यक्ति तक संसाधनों का वितरण समान रूप से हो।


अन्न संरक्षण-

देश की बहुत बड़ी जनसंख्या आज भी भूखी है। दूसरी तरफ एक अनुमान के अनुसार भारत के शहरों में 10-15 प्रतिशत से ज्यादा खाना बेकार हो जाता है, होटलों में यह 25 प्रतिशत तक है। इसे बचाकर हम अन्य लोगों को भोजन दे सकते हैं। जिससे आगे चलकर निश्चित रूप से अनाज सस्ता हो जाएगा।

हमारे देश में कणाद नाम से एक ऋषि हुए जो अपने शिष्यों के साथ किसान के खेत से अन्न बटोर लेने के बाद उसी खेत से जमीन पर गिरा एक-एक दाना इकट्ठा करते थे और साल भर ऋषिकुल चलाते थे।

श्रीकृष्ण ने संदेश दिया था कि मानव को अन्न के एक-एक दाने का आदर करना होगा।

गायत्री परिवार के आचार्य श्रीराम ने भी कहा है कि धरती मां अपना सीना चीरकर हमें भोजन के लिए अन्न उपलब्ध कराती है। इसे बर्बाद होने से बचाएं।

-कायदे से होना यह चाहिए कि हम अपनी थाली में खाना उतना ही लें जितना खा सकें। हम कम-कम लें और बार-बार लें। यह अपनी आदत बना लें।

-बचे खाने को सहेजें या किसी अन्य के उपयोग के लिए दें।

-पार्टी में बचे खाने को जरूरतमंदों तक पहुंचाने की समुचित व्यवस्था होनी चाहिए।

-अनाज को चूहों और कीड़ों से बचाएं, यह सड़े नहीं, बेकार न हो इसके लिए जागरूकता फैलाने की जरूरत है।

-अनाज को स्टोर कर सड़ाने वालों पर सख्त दंड का प्रावधान हो।


जल संरक्षण-

हमारे देश के कई क्षेत्र भीषण जल संकट से जूझते आ रहे हैं। इसके बावजूद हम जल संरक्षण पर अपेक्षित ध्यान नहीं दे पा रहे हैं। स्थिति यह है कि हम 2 प्रतिशत से भी कम वर्षा जल  का ही उपयोग कर पा रहे हैं इसीलिए पानी का अभाव है।

शहरों में कॉरपोरेशन का स्वच्छ पानी सप्लाई होने के बावजूद हम लोग पानी को शुद्ध करने के लिए आर. ओ. लगाकर 70 प्रतिशत तक पानी को नालियों में बहा रहे हैं। जबकि यहां आर. ओ. की जरूरत ही नहीं है। इसी के चलते अधिकांश शहरों में पीने के पानी की किल्लत बनी हुई है।

दुखद है कि कहीं पीने के लिए पानी नहीं है तो कहीं लोग गाडी धो रहे हैं। राष्ट्र के जिम्मेदार नागरिक होने के नाते हम जल संरक्षण में कुछ हाथ बंटा सकते हैं-

-बचे हुए पानी का उपयोग खेत-गमले आदि में करें, नाले में न बहाएं।

-पानी को रिसाइकल कर पुन: उपयोग में लाएं।

-वाश बेसिन का पानी सिस्टन में उपयोग करें।

-एस.टी.पी. के पानी का गार्डनिंग में उपयोग हो।

क्या करें-

-टपकते हुए नल की जल्दी मरम्मत कराएं।

-दाढ़ी बनाते समय नल खोलकर न रखें। इसके लिए गिलास या मग में पानी लें।

-मुंह धोते समय नल खुला रखने के बजाए पानी मग में लें, नल के नीचे बाल्टी लगाएं।

-बाल्टी में बचा पानी गमले या पेड़ों में डालें।

-बोतल के बचे पानी का उपयोग गमले में करें।

-गाडी धोने के लिए बाल्टी में पानी लें और पोछे से गाडी साफ करें।

-रेन वाटर हार्वेस्टिंग का उपयोग कर जमीन में जल स्तर बढ़ाएं।

-पानी संचय करने वाले चौड़ीपत्ती वाले वृक्षों का रोपण

-मेड बांधकर तालाब आदि का पुनर्निर्माण


नदी स्वच्छता/ जल संरक्षण –

-नदियों में विसर्जित की जाने वाली पूजा सामग्री/ फूलों की खरीद योजना का कार्यान्वयन

-गंगा समेत सभी नदियों में कूड़ा-करकट न डालें।

-नदी के जल में सीवर का पानी न छोड़ें। ऐसा करने वालों पर सख्त कार्रवाई हो।

-सांस्कृतिक कार्यक्रमों द्वारा जनजागरूकता- गंगा स्मरण-अभियान शुरू करना


ऊर्जा संरक्षण-

उन्नत राष्ट्र की आधुनिक परिभाषा अत्यधिक ऊर्जा खर्च करने से है, लेकिन राष्ट्र की ऊर्जा को अनावश्यक रूप से बर्बाद करने पर हम उन्नत नहीं हो सकते। अत: हम इसके संरक्षण पर ध्यान दें।

-बिजली बचाकर इसी बिजली को अधिक से अधिक लोगों के लिए उपयोगी बनाया जा सकता है जिससे बिजली उत्पादन में देश का कम से कम खर्च हो।

-जहां जरूरत न हो लाइट ऑफ करें।

-पंखे में इलेक्टॉनिक रेगुलेटर लगाएं और 35 प्रतिशत बचाएं।

-एल.ई.डी. बल्बों का उपयोग कर 60 प्रतिशत तक बिजली बचाई जा सकती है।

-स्ट्रीट लाइट के दिन में भी जले होने पर स्थानीय विद्युत विभाग को सूचित करें।

-उपकरणों को स्टैंड बाय मोड पर रखने पर भी बिजली खर्च होती रहती है। कंप्यूटर में मॉनिटर आदि से ज्यादा बिजली खर्च करते हैं। स्क्रीन सेवर से बिजली की बचत नहीं होती। अगर कंप्यूटर ऑन भी रखना हो तो मॉनिटर ऑफ कर दें।

-ए.सी. को 24 डिग्री पर सेट करें और पंखा चलाएं। इससे कम से कम 30 प्रतिशत बिजली बचाई जा सकती है।

-सफेद टायल व पेंट का प्रयोग कर ए.सी. के खर्चे में 20 प्रतिशत की कमी की जा सकती है।

-सन कंट्रोल फिल्म लगाकर, सूरज के रेडियेशन से घर व ऑफिस को बचाकर ए.सी. के खर्चे में 10 प्रतिशत की बचत की जा सकती है।
-खिड़की व दीवारों पर पौधे लगाकर ए.सी. चलाने के खर्चे में 40 प्रतिशत की बचत की जा सकती है।


पेट्रोलियम संरक्षण-

एक अनुमान के अनुसार दुनिया में अगर इसी रफ्तार से पेट्रोलियम का उपयोग बढ़ता रहा तो अगले 40-50 वर्षों में सारा पेट्रोलियम खत्म हो जाएगा। इस भयावह स्थिति को देखते हुए अपने देश में पेट्रोलियम संरक्षण पर बहुत ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है।

– लालबत्ती आदि जगहों पर, जब जरूरत न हो गाडी बंद कर दें।

-गैस में चौड़े तले के बजाए लंबाई वाले बर्तन प्रयोग करने से 20 प्रतिशत रसोई गैस बचाई जा सकती है।

-दालों को पकाने से कुछ समय पहले भीगाकर रखने से 15 प्रतिशत तक गैस बचाई जा सकती है।

-छोटे बर्नर के प्रयोग से 30 प्रतिशत तक गैस बचाई जा सकती है।


पर्यावरण संरक्षण-

ग्लोबल वार्मिंग आज सबसे बड़ी अंतरराष्ट्रीय समस्या और चुनौती है। इसके भयंकर दुष्प्रभाव तमाम देशों को चिंतित किए हुए हैं। रियो, क्योटो, पेरिस आदि अंतराष्ट्रीय सम्मेलनों में ग्लोबल वार्मिंग को रोकने पर विचार होता रहा है। दुनिया के साथ कंधा से कंधा मिलाकर हम भी पर्यावरण को बचाने में अपना अहम योगदान दे सकते हैं।

1-वेस्ट टू वेल्थ- कूड़ा समस्या नहीं संसाधन बनाएं। हमारे द्वारा दौलत राम कॉलेज- दिल्ली विश्वविद्यालय में किये गये कार्य इस हेतु प्रेरणा बन सकते हैं।

-शहरों में मुख्य समस्या कूड़े का डिग्रेडेशन है। सूखे और गीले कूड़े को अलग-अलग करें।

-पेपर, धातु, रिसाइकल मैटिरियल को कूड़े में न मिलाएं। इन्हें इकट्ठा कर बिक्री से पैसा कमाएं।

-गीला कूड़ा सब्जी आदि के छिलके को गमले में डालकर व किचन गार्डन बनाकर ताजी सब्जियों का आनंद लें।

-चावल-दाल का धुला पानी नाली में डालने के बजाए गमलों में डालें, प्रोटीन से भरपूर यह पानी आपकी सब्जियों की उपज बढ़ाएगा।

2- वायु प्रदूषण- फ्रिज, ए.सी. की गैस को सीधे वातावरण में मुक्त करने से ओजोन लेयर के साथ वातावरण प्रदूषित हो रहा है। इसको सख्ताई से रोका जाना चाहिए।

3- जैविक (ऑर्गेनिक) खेती

रासायनिक खाद/ कीटनाशक मुक्त खेती- नदियों और वायु प्रदूषण को कम करेगी।


उपभोक्ता संरक्षण-

आज बाजार की ताकतें उपभोक्ताओं को अपने हिसाब से चीजें परोस रही हैं। अगर उपभोक्ता सजग नहीं हुए तो निश्चित रूप से ये ताकतें उनका मनमाने ढंग से शोषण करेंगी।

कंज्यूमर रेवल्यूशन- एक राष्ट्र एक समाधान- थ्रो वन इंडिया पोर्टल। तत्काल कम्पलेन व बी.पी.ओ. एप्स, ऑडियो विजुवल कम्पलेन

-वृहद जानकारी कार्यक्रम

-अधिवक्ताओं और विशेषज्ञों का राष्ट्रीय पैनल तैयार करना।

-अन्य संस्थाओं के साथ साझा प्रोग्राम।

-उपभोक्ता संरक्षण की खोखली बातें करने वालों के खिलाफ जन आंदोलन व चेतना पैदा करना- उपभोक्ता को सवाल खड़े करने के लिए तैयार करना अन्यथा बाजार पर कब्जा करने वाली शक्तियां एक ही रात में पूरे देश में आयोडीनयुक्त नमक बेचना शुरू कर देती हैं।

-राष्ट्र का नमक (टाटा नमक) जैसे झूठे एवं भ्रामक दावों की पोल खोलना व इन मुद्दों को जनता एवं अदालत तक ले जाना।

-राष्ट्रीय उपभोक्ता पुरस्कारों के लिए जमीन तैयार करना।

-बैंक, इंश्योरेंस, रेलवे, बस, जल-विद्युत वितरण आदि की गुणवत्ता व जन चार्टर तैयार करना।

-उपभोक्ता अधिकारों को सुनिश्चित करना।


भाषा संरक्षण-

राष्ट्र भाषा हिंदी हमारी आत्मा है। यह हमें एक सूत्र में बांधकर विकास की ऊंचाइयों तक ले जाएगी। राष्ट्र की अन्य भाषाओं से इसका संपर्क सुदृढ़ रहे, इसके लिए काम करने की जरूरत है।

-एक राष्ट्र- राष्ट्रीय बहुभाषा पोर्टल

-संस्कृत को बढ़ावा देने के कार्यक्रम- स्कूलों में प्रतियोगिता एवं वर्कशॉप आदि

-पुरातन ज्ञान संरक्षण

-योग पोर्टल की तैयारी

-आसान योग तरीकों का विकास

-योग के विभिन्न तरीकों की जानकारियां बढ़ाना

-सेमिनार और वर्कशॉप के माध्यम से योग को दू-दूर तक पहुंचाना।