Introduction

सरदार पटेल का भारत

आज जो हम भारत देखते हैं वास्तव में वो 15 अगस्त 1947 के दिन आजाद हुआ भारत नहीं है, बल्कि सरदार पटेल की जिजीविषा का वह भारत है जिसको एक सशक्त राष्ट्र के तौर पर देखने का सपना उनके दिलो-दिमाग में देश की आजादी से पहले ही था। सन् 1945 में इस संबंध में उन्होंने मेनन के साथ मिलकर 562 रियासतों से निरंतर वार्ताएं कर उन्हें भारत में मिलने वाली सुविधाओं का लालच देकर अपने साथ किया। तीन अन्य राज्यों- जूनागढ़ हैदराबाद, कश्मीर को बलपूर्वक 1948 में भारत संघ का हिस्सा बनाया। सरदार पटेल का मानना था कि जब तक राष्ट्र का प्रत्येक व्यक्ति अधिकार के साथ अपना उत्तरदायित्व नहीं समझेगा तब तक सशक्त राष्ट्र नहीं बन सकेगा। सर्व प्रथम जन-जन को नागरिक बनाना होगा। सिर्फ राष्ट्रगान, झंडे और मुद्रा का आदर कर देने भर से ही राष्ट्र सशक्त नहीं बन जाता।

हमें यह सोचना होगा कि हम समाज और देश के लिए क्या कर रहे हैं। अपनी आगे आने वाली पीढ़ी के लिए क्या कर रहे हैं।

महाभारत में भीष्म ने भी राष्ट्रवाद के बारे में कहा है-

1- हम राष्ट्र के लिए दुर्लभतम् की प्राप्ति का संकल्प लें।

2- दुर्लभतम् की प्राप्ति के बाद उसका संरक्षण करें।

3- राष्ट्र की संपदा का नागरिकों में समान भाव से वितरण हो।

समृद्ध राष्ट्र- सशक्त राष्ट्र,
संगठित भारत- सशक्त भारत


सरदार पटेल की इन्हीं भावनाओं को सम्मान देते हुए हम काम करना चाहते हैं।

राष्ट्र को सरदार पटेल की समृद्ध परंपरा का ज्ञान तब होगा जब पटेल से संबंधित किताबों, पत्रों, भवनों-स्मारकों आदि का संरक्षण कर उन्हें म्यूजियम या स्मृति संग्रहालय के द्वारा जन-जन तक पहुंचाया जाएगा। इस उद्देश्य के लिए हम सबको एकजुट होना पड़ेगा।

सरदार पटेल का मानना था कि पड़ोसी देशों से अच्छे रिश्ते बनाकर ही हम समृद्ध और सशक्त हो सकते हैं। 1950 में चीन के तिब्बत में घुसने पर पटेल बहुत आहत हुए। उसी दौर में उन्होंने नेपाल में प्रजातांत्रिक लड़ाई के लिए हर संभव सहायता भी की।

अनुसूचित जाति एवं जनजाति के प्रति उनको बड़ा स्नेह था। 1924 में अहमदाबाद नगर निगम में पहली बार अश्पृश्यों को टिकट देकर उन्होंने पार्षद बनवाया। डाक्टर भीमराव अंबेडकर को 1947 में संविधान सभा का सदस्य और संविधान की ड्राफ्ट कमेटी का चेयरमैन, भारत का पहला केंद्रीय कानून मंत्री बनवाया। बाबू जगजीवन राम को अपने कोटे से मंत्री बनवाया। यही नहीं ज्ञानी जैल सिंह को जेल से रिहा करवाकर पंजाब में मंत्री पद दिलवाया। मानवीय गुणों से ओत-प्रोत पटेल जी ने 1946-47 में जबरन मजदूरी को संविधान में अवैध घोषित करार दिया। उन्हीं का जज्बा था कि भारत 1948 में मानवाधिकार कानून लागू करने वाला पहला देश बना।